नीमच। यह घटना 12 अप्रैल 2019 की है। फरियादी वसीम ने नीमच केंट थाने पर शिकायत दर्ज कराई थी कि करीब 2 साल पूर्व आरोपित अजहर ने आरोपित रंजना नागदा से उसकी पहचान कराई थी। इसके बाद आरोपित रंजना नागदा ने अन्य आरोपित शालू से भी मिलवाया था। इसके बाद से आरोपितों ने अन्य आरोपित रहमत, मोहम्मद और भूरा के साथ मिलकर वसीम को डरा-धमकाकर मोबाइल फोन ले लिया था। समय-समय पर करीब 8 लाख रुपए वसूल लिए। आरोपित रंजना नागदा ने फरियादी वसीम को धमकाया था कि वह 2 लाख रुपए दे दें नहीं तो तुम्हारा वीडियो वायरल करके बाजार में बदनाम कर दूंगी। इस घटनाक्रम के बाद आरोपित अजहर ने रात करीब 10 बजे बुलाया। उसके साथ मोहम्मद व रहमत भी थे। उन्होंने वसीम को कमल चौक के पास सेंट्रल बैंक की गली में बुलाकर धमकाया कि 5 लाख रुपए दे दें। हम मामला खत्म कर देंगे। साथ ही फरियादी के साथ मारपीट भी की। मौके पर वसीम का भाई नदीम पहुंचा और उसने बीच-बचाव किया। इस पर जाते-जाते आरोपितों ने कहा कि रुपए नहीं दिए तो तुझे जान से खत्म कर देंगे।
इस घटनाक्रम के बाद फरियादी वसीम ने नीमच केंट थाने में आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया। पुलिस ने प्रकरण में विवेचना पूर्ण कर 3 आरोपित शालू उर्फ सुल्ताना, अजहर शेख और रंजना नागदा को गिफ्तार कर उनके खिलाफ चालान पेश किया। शेष 3 आरोपित रहमत, मोहम्मद और भूरा के फरार होने से उनके खिलाफ विवेचना जारी है। गिरफ्तार आरोपितों की ओर से जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इसमें से पूर्व में शालू उर्फ सुल्ताना को जमानत प्रदान की गई थी। बाकी दो आरोपित अजहर और रंजना नागदा का जमानत आवेदन निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद आरोपित अजहर की और से न्यायालय के समक्ष पुनः जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया। जमानत का आवेदन का एडीपीओ रितेश कुमार सोमपुरा ने लिखित में विरोध किया और तर्क रखे। साथ ही अपराध को गंभीर प्रकृति का बताया। अभियोजन पक्ष के तर्कों से सहमत होकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नीमच विवेकानंद त्रिवेदी ने आरोपित रिसाला मसजिद नीमच के अजहर पिता मोहम्मद अफजल शेख (24) का जमानत आवेदन खारिज कर दिया। उक्त आरोपित गिरफ्तारी की दिनांक से जेल में निरुद्ध है।
